CG हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की दो टूक: 'बेंच हंटिंग' रोकने वाला सर्कुलर अदालती कामकाज में दखल नहीं
CG हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की दो टूक: 'बेंच हंटिंग' रोकने वाला सर्कुलर अदालती कामकाज में दखल नहीं
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि बेंच हंटिंग को लेकर जारी सर्कुलर न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सावधानी की सूचना है, सुनवाई से हटना अनिवार्य नहीं है।
एक दंपती के मामले में सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि हाल ही में जारी सर्कुलर का मतलब केवल निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है, न कि अदालती कामकाज में हस्तक्षेप करना।
17 अप्रैल 2026 को यह मामला एक अन्य डिवीजन बेंच में सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ था। इस दौरान बेंच के एक सदस्य ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। आदेश में 16 अप्रैल को जारी सर्कुलर पर टिप्पणी करते हुए कहा गया था कि यह कोर्ट के कामकाज में हस्तक्षेप जैसा प्रतीत होता है। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए अलग बेंच तय करने के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष पेश करने को कहा गया था।
बेंच चुनने की कोशिशों को रोकना
29 अप्रैल को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सर्कुलर का मतलब साफ है कि बेंच हंटिंग यानी अपनी पसंद की बेंच चुनने की कोशिशों को रोकना है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोर्ट अनजाने में किसी निहित स्वार्थ वाले पक्षकार का हथियार न बन जाए। यह सर्कुलर किसी जज को हटने के लिए मजबूर नहीं करता, केवल सतर्क रहने के लिए एक नोट ऑफ कॉशन है।